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लता मंगेशकर पर एक बार नहीं कई बार भड़के थे दिलीप कुमार, जानिए क्यों?

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लता मंगेशकर पर एक बार नहीं कई बार भड़के थे दिलीप कुमार, जानिए क्यों? अभिनेता दिलीप कुमार और लता मंगेशकर एक दूसरे के बेहद करीब हैं और दोनों का रिश्ता सगे भाई बहनों से भी ज्यादा गहरा है। लता मंगेशकर बताती हैं कि बॉलीवुड में किसी को वो अपने सबसे करीब पाती हैं, तो वो हैं दिलीप कुमार जो शुरु से ही उन्हें अपने छोटी बहन की तरह प्यार करते आए हैं। लता मंगेशकर के अनुसार ये अपनापन और नेकी जो दिलीप कुमार में हैं वो आजकल लोगों में देखने को नहीं मिलती है और उनसे मिलने वाले स्नेह और प्यार की लता हमेशा आभारी रहेंगी।

संगीतकार कल्याण जी आनंद जी की जोड़ी में से कल्याण जी भाई के घर पर पार्टी हो रही थी जहां दिलीप कुमार, लता मंगेशकर से नाराज़ हो गए थे। दरअसल सभी लोग खाने की मेज़ पर थे और मेज़ पर रखी पान-सुपारी की तश्तरी लता मंगेशकर ने सहज ही दिलीप कुमार की तरफ बढ़ा दी। अचानक हंसते हुए दिलीप कुमार का चेहरा गंभीर हो गया और उन्होनें अधिकारपूर्वक लता को अपनी बात समझाई। “लता, ये ठीक नहीं हैं। भले घर की शरीफ़ लड़कियां इस तरह किसी को पान या सुपारी पेश नहीं करती। मुझे यह अच्छा नहीं लगा और आप मेरी छोटी बहन है इस अधिकार से ये आपको कह दिया।”

दिलीप कुमार लता को लेकर इतने फिक्रमंद रहते थे कि उनकी लाइव कॉन्सर्ट की लिस्ट को लेकर वो एक बार बेहद गुस्सा हो गए थे। 1974 में लंदन के रायल एल्बर्ट हॉल में लता मंगेशकर अपना पहला कार्यक्रम कर रही थी तो उसकी शुरुआत करने के लिए दिलीप कुमार को बुलाया गया था। दिलीप कुमार अपने काम में इतने सलीके वाले और छोटी छोटी बातों पर ध्यान देने वाले थे कि आप उन्हें ‘परफ़ेक्शनिस्ट’ कह सकते थे और इसलिए अपनी स्पीच तैयार करने के लिए उन्होनें लता से उनके गानों की लिस्ट मांग ली।

पाक़ीजा के गाने ‘इन्ही लोगों ने ले लीना दुपट्टा मेरा’ के साथ इस कार्यक्रम की शुरुआत करने के विचार से वो थोड़ा नाराज़ हो गए और बोले। “यह गाना आप क्यों गाना चाहती हैं, जबकि इसके बोल उतने शाईस्ता नहीं हैं?” इस पर लता ने दिलीप साहब को समझाने की कोशिश भी की कि ये गाना बेहद लोकप्रिय है और लोग इसे सुनना चाहेंगे, लेकिन दिलीप साहब इससे सहमत नहीं हुए, पर कुछ बोले भी नहीं।

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