राजेश रोशन, जिनसे रोशन है फिल्म संगीत की दुनिया , आज संगीतकार राजेश रोशन का जन्मदिन है। 24 मई 1955 को जन्में 63 वर्षीय राजेश रोशन की पहचान भले ही एक संगीतकार के रूप में है, लेकिन कभी उनका मानना था कि संगीतकार बनने से अच्छा है कि वो 10 से 5 बजे तक की कोई सरकारी नौकरी कर लें ताकि उनका जीवन सुरक्षित रहे। बहरहाल, समय ने पलटी खायी और बॉलीवुड को एक से एक उम्दा संगीत देने वाला एक संगीतकार मिला! राजेश रोशन के पिता रोशन भी अपने दौर के एक जाने-माने संगीतकार रहे हैं।

1979 में अमिताभ बच्चन की फ़िल्म ‘मिस्टर नटवरलाल’ में संगीत देने वाले राजेश रोशन के लिए यह एक बड़ी कामयाबी रही। इस फ़िल्म का गीत ‘परदेसिया ये सच है पिया’ काफी पसंद किया गया। क्या आप जानते हैं, इस फ़िल्म से पहले अमिताभ बच्चन ने कभी किसी फ़िल्म में कोई गीत नहीं गाया था। इस फ़िल्म के लिए राजेश रोशन ने अमिताभ से पहली बार गाना गवाया- ‘मेरे पास आओ मेरे दोस्तों!’ यह गीत श्रोताओं के बीच आज भी खासा पॉपुलर है और आप इसे अक्सर रेडियो पर भी सुनते होंगे।

इसे भी पढ़िए:   किशोर कुमार, जिसकी गायकी में एक बंदगी थी

राजेश रोशन अपनी फ़िल्म ‘जूली’ और ‘कहो न प्यार है’ के लिए अब तक दो बार बेस्ट म्युज़िक डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड जीत चुके हैं। राजेश रोशन ने अपने करियर में अब तक 125 से ज्यादा फ़िल्मों में संगीत दिया है। इंडियन सिनेमा इंडस्ट्री के पास संगीतकार के रूप में एक से एक रत्न रहे हैं पर इन सबके बीच राजेश रोशन भी एक ज़रूरी नाम हैं।

इसे भी पढ़िए:   बॉलीवुड की सेक्स सायरन के नाम से फेमस है ये एक्ट्रेस, वैनिटी वैन में किया था...

राजेश रोशन के पिता जो एक प्रसिद्ध संगीतकार थे और ‘ताजमहल’ जैसी फ़िल्म के लिए म्युज़िक का फिल्मफेयर अवार्ड तक जीत चुके थे उनकी मौत महज 50 साल की उम्र में ही हो गयी थी। यह साल 1967 की बात है जब राजेश सिर्फ 12 साल के थे। पिता की मृत्यु के बाद उनकी मां संगीतकार फैयाज़ अहमद ख़ान से संगीत की शिक्षा लेने लगीं। उनके साथ राजेश भी वहां जाया करते थे और यहीं से संगीत उनकी ज़िंदगी में उतरना शुरू हुआ और वह फैयाज़ साहब से विधिवत संगीत की शिक्षा लेने लगे।

संगीत की शिक्षा लेते हुए ही राजेश रोशन फेमस संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के सहायक के तौर पर जुड़ कर काम करने लगे। उन्होंने लगभग पांच साल तक उनके साथ काम किया। वहां रहते हुए राजेश ने संगीत की बारीकियों को समझा। उसके बाद उन्होंने अपनी एक अलग राह बनायी। उन्हें बड़ा मौका मिला 1974 में महमूद की फ़िल्म ‘कुंवारा बाप’ में। यहीं से उन्होंने संगीतकार के रुप में अपने सिने करियर की शुरूआत की। लेकिन, यह फ़िल्म कुछ खास नहीं कर सकी।

इसे भी पढ़िए:   पहली कमाई थी महज़ 1000 रुपये जूही चावला की, चौंक गए ना आप!

राजेश रोशन को कामयाबी मिली 1975 में आई फ़िल्म ‘जूली’ से। इस फ़िल्म में ‘दिल क्या करे जब किसी को’, ‘माई हार्ट इज बीटिंग’, ‘ये रातें नई पुरानी’ और ‘जूली आई लव यू’ जैसे सांग श्रोताओं के बीच काफी पॉपुलर हुए।

LEAVE A REPLY

20 + 9 =