अक्षय खन्ना | विरासत में मिले अभिनय के गुर से अपने दम पर हासिल की सफलता

जन्मदिन विशेष

अक्षय खन्ना | विरासत में मिले अभिनय के गुर से अपने दम पर हासिल की सफलता, अपना 43वां बर्थडे मना रहे अक्षय खन्ना को इंडस्ट्री में पहली पहचान पिता विनोद खन्ना के बेटे होने की वजह से मिली। दूसरी पहचान राहुल खन्ना का भाई और तीसरी पहचान उनके किरदारों ने उन्हें दी।

अक्षय खन्ना की पहली फिल्म ‘हिमालय पुत्र’ बुरी तरह फ्लॉप रही। फिल्म के निर्माता अक्षय खन्ना के पिता विनोद खन्ना थे। ‘हिमालय पुत्र’ के फ्लॉप होने के बाद अक्षय खन्ना की दूसरी फिल्म ‘बॉर्डर’ जबरदस्त हिट रही। इस फिल्म में उनके साथ सन्नी देयोल, सुनील शेट्टी, जैकी श्रॉफ जैसे दिग्गज कलाकार थे लेकिन अक्षय खन्ना का काम क्रिटिक्स और दर्शकों दोनों के नोटिस में आया।

इसके बाद उनकी ‘मोहब्बत’, ‘कुदरत’, ‘लावारिस’ जैसी एक के बाद एक असफल फिल्में आई और अक्षय को मुश्किल दौर का सामना करना पड़ा। इसके बाद 1999 में ऐश्वर्या राय के साथ आई उनकी फिल्म ‘आ अब लौट चलें’ ने उनके करियर को थोड़ा सहारा दिया।

हालांकि ये फिल्म ज्यादा नहीं चली लेकिन ऐश के साथ अक्षय की जोड़ी पसंद की गई और फिर दोनों ने साथ में दोबारा शो-मैन सुभाष घई के साथ ‘ताल’ फिल्म में काम किया।

अपने जमाने के ए क्लास एक्टर विनोद खन्ना के बेटे अक्षय खन्ना ने कभी एक्टिंग क्लासेस नहीं ली और न ही ज्यादा हिंदी फिल्में देखी। बावजूद इसके अक्षय को हमेशा से पता था कि वो एक्टर ही बनेंगे। सिर्फ 18 साल की उम्र में अक्षय ने एक्टिंग की दुनिया में कदम रख दिया था।

बिना एक्टिंग स्कूल जाए, बिना कोई क्लासेस लिए और बिना ज्यादा हिंदी फिल्मों को देख एक्टिंग के गुण अक्षय खन्ना ने कैसे सीखे ये तो खैर वहीं बता सकते हैं, हां लेकिन एक बात जरुर है कि कुछ चीजें सीखीं नहीं जाती वो इनहैरिट होती हैं जैसे अक्षय खन्ना को एक्टर पिता के चलते ये विधा विरासत में मिली और इसी के बलबूते वो एक से बढ़कर एक हैरान करने वाले किरदार निभाते चले गए। जिनमें कॉमेडी, विलेन और सीरियस सभी तरह के रोल थे। इन सभी रोल्स में अक्षय खन्ना ने इंडस्ट्री को एक बेहतरीन कलाकार दिया।

अक्षय के करियर को पुश मिला साल 2001 में आई फिल्म ‘दिल चाहता है’ से, इस फिल्म में उन्होंने आमिर खान, सैफ अली खान के सामने परफॉर्म किया और ‘सिद्धार्थ’ के किरदार में उन्होंने हैरान कर दिया, जिसे उम्रदराज महिला (डिंपल कपाड़िया) से प्यार हो जाता है। ये अक्षय के करियर का टर्निंग प्वाइंट था।

इसके बाद अक्षय खन्ना ने कई क्रिटिकल एक्कलेम फिल्मस की। इनमें खास हैं अब्बास-मस्तान की ‘हमराज’, ‘हंगामा’, ‘हलचल’, ‘रेस’, ‘गांधी, माय फादर’, ‘मॉम’ और ‘इत्तेफाक’। इन सभी फिल्मों में अपने किरदारों से अक्षय खन्ना ने लोगों के दिलों में खास जगह बना ली।

‘गांधी, माय फादर’ में महात्मा गांधी के बेटे हरीलाल गांधी का किरदार निभाया जिसे अक्षय का अब तक का सबसे बेहतरीन काम माना जाता है। वहीं श्रीदेवी के साथ फिल्म ‘मॉम’ में उस शार्प पुलिस इंस्पेक्टर का रोल जिसमें वो मामले की तह तक जाता है लेकिन अंत में मां का साथ देता है।

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