अध्विक महाजन | तमस के ज़रिए बेहतरीन सोशल मैसेज देने की कोशिश

अध्विक महाजन (Adhvik Mahajan) ने पंजाबी, तेलगू और हिन्दी में फिल्में की हैं। इसके अलावा वो कई टीवी सीरियल्स में भी नज़र आए हैं। जैसे बानी इश्क का कलमा जिसमें उन्होंने सोहम का किरदार निभाया था। या फिर अकबर बीरबल, दिया और बाती हम, नागिन 3, दिव्य दृष्टि, जमाई राजा। इन सीरियल्स के ज़रिए अध्विक महाजन की एक अलग ही इमेज बन चुकी है।

अब अध्विक (Adhvik Mahajan) महाजन ने शॉर्ट फिल्म में हाथ आजमाया है। फिल्म यू ट्यूब पर रिलीज हो चुकी है और लोग इसे पसंद कर रहे हैं। फिल्म का नाम है तमस। इस फिल्म में अध्विक महाजन के साथ रश्मि देसाई नजर आ रही है। इसी फिल्म को लेकर अध्विक महाजन से Gossipganj.com के संपादक मधुरेंद्र पाण्डे ने बात की।

मधुरेंद्र पाण्डे – तो चलिए बात की शुरुआत आपकी शॉर्ट फिल्म तमस से करते हैं। तो बताइये कि इस फिल्म का आइडिया आपके दिमाग में कब और कैसे आया?

अध्विक महाजन – मैं जालंधर से हूं। मुंबई और दिल्ली से काफी छोटा शहर है। मैंने सब कुछ अपने व्यक्तिगत अनुभव से सीखा है। ये बात अलग है कि मुंबई आकर मेरा थॉट प्रासेस चेंज हुआ।

मेरे कई मित्र हैं मुंबई में, जो मेरे काफी करीब हैं। आपको बता दूं कि मैं जितनी बाद गुरुद्वारे गया हूं उतनी बार शायद मंदिर नहीं गया हूं। ऐसे ही मेरे दोस्त हैं। हम लोगों को किसी कम्यूनिटी से कोई फर्क नहीं पड़ता है। मैं पहले इंसान हूं और ये संस्कार मुझे मेरे माता पिता से मिले है। यही वजह है कि मैं इस तरह के कॉन्सेप्ट को सोच पाया।

मधुरेंद्र पाण्डे – कहानी के बारे में कुछ बताना चाहेंगे कि कैसे लिखी गई ये कहानी?

अध्विक महाजन – हम लोग बहुत सारे ऐसे काम करते हैं जो जाने अनजाने में किसी को दुख पहुंचा देता है। मैं इस बात को महसूस करता हूं। इसीलिए मैं इस तरह की कहानी पर काम कर पाया। मैंने कभी इस पर फिल्म नहीं बनाई।

लेकिन जब कोरोना वायरस के फैलने के दौरान एक खास समुदाय को टारगेट किया जाने लगा तो मुझे लगा कि अब कुछ कहना चाहिए। देखिए एक बात तो साफ है कि कोरोना को किसी ने जानबूझ कर नहीं फैलाया है।

हां उन लोगों ने सावधानियां नहीं रखीं जो गलत है लेकिन इस बीच ये ज़रूर ख्याल रखें कि गलतियां इंसान करता है उसका धर्म से कोई लेना देना नहीं होता है। मेरी सोच है कि भले ही मैं दुनिया ना बदल पाउं लेकिन एक कोशिश तो की ही जा सकती है। मैंने अपने करीबी मुस्लिम मित्रों को देखा है कि वो कैसे इन सबके बीच परेशानी उठा रहे हैं।

मधुरेंद्र पाण्डे – आपने फिल्म शूट कैसे की। लॉकडाउन के दौरान कैमरा लाइट्स और बाकी इक्विप्मेंट्स कैसे मैनेज किए?

अध्विक महाजन – मैंने कहानी तो लिख ली थी लेकिन उस वक्त शूटिंग के बारे में नहीं सोचा था। जब कहानी पूरी हो गई तब सोचना शुरु किया कि अब इस फिल्म को शूट कैसे किया जाएगा। ना तो मेरे पास प्रोफेशनल कैमरा था ना ही ट्राइपॉड था, जिस पर कैमरा रखा जा सकता था। इतना ही नहीं लोकेशन भी नहीं थी। फिर मैंने अपने लिविंग रूम को खाली किया। सामान सारा बाहर पहुंचाया और अपने घर को लोकेशन टाइप बना डाला।

उसके बाद कैमरे के बारे में सोचा तो ऐसा कोई प्रोफेशनल कैमरा तो मेरे पास था नहीं। तो मैंने सोचा कि क्यों ना अपने मोबाइल कैमरे से ही पूरी फिल्म शूट कर ली जाए। ट्राइपॉड की जगह मैंने स्टूल का इस्तेमाल किया। एक के ऊपर एक स्टूल रखा और अपने मोबाइल को वहां एडजस्ट किया और शूटिंग चालू।

मधुरेंद्र पाण्डे – चलिए शूटिंग तो शुरू कर दी उसके बाद कैसी दिक्कतें आई?

अध्विक महाजन – मुझे शूटिंग के लिए नेचुरल लाइट चाहिए थी और मेरे फ्लैट में सिर्फ तीन घंटे ही नेचुरल लाइट आती है। तो उसी में एडजस्ट किया। इस सारे शूट के दौरान मेरी पत्नी नेहा ने मेरी काफी मदद की।

मधुरेंद्र पाण्डे – चलिए लेकिन ये बताइये कि रश्मि देसाई जी को आपने फिल्म के लिए कैसे मनाया?

अध्विक महाजन – मैने रश्मि जी को कहानी भेजी थी। जिसे पढ़ने के बाद उन्होंने तुरंत हां कर दी। कुदरत ने सारी चीज़ें अपने आप जैसे सेट कर दी थीं। फिल्म शूट भी हो गई फिर पोस्ट प्रोडक्शन में काफी समय लगा। खैर फिल्म तैयार हुई। मैं इस दौरान लोगों के फोन नहीं उठाता था। लोग कहते थे शॉर्ट फिल्म में कितना समय लगाओगे।

मधुरेंद्र पाण्डे – फिल्म का नाम आपने तमस ही क्यों रखा।

अध्विक महाजन – तमस का अर्थ होता है अंधकार और लॉकडाउन के वक्त लग रहा था वो तमस ही था। इसके अलावा एक मैसेज भी था जो समाज में रोशनी फैला सके। मेरा मानना है कि जो आप दिल से चाहते हैं उस पर फोकस रखना चाहिए। इस फिल्म में एक मैसेज है। फिल्म बनने के बाद फिल्म का नाम रखा और फिर बाद में इसका पोस्टर डिजाइन करवाया।

मधुरेंद्र पाण्डे – फिल्म के रिलीज के बारे में कुछ बताएं।

अध्विक महाजन – फिल्म पूरी होने के बाद मैंने फिल्म को दो तीन जगह भेजा लेकिन कुछ ने रिस्पॉन्स ही नहीं दिया तो कुछ ने काफी देर में रिलीज करने की बात कही। बाद में हमारा मूवी ने इसे रिलीज करने पर सहमति जता दी और फिल्म रिलीज हो गई।

मधुरेंद्र पाण्डे – इस फिल्म को देखकर लगता है कि आपने एक खास मैसेज देने के लिए फिल्म बनाई है?

अध्विक महाजन – मैं दुनिया को इस फिल्म के जरिए मिठास देना चाहता हूं। भले ही तीन महीने टोटल प्रोसेज में लग गए लेकिन मैं खुश हूं। मेरी पूरी सोसायटी जहां मैं रहता हूं उन लोगों ने फिल्म देखी और काफी प्यार दिया। मेरे ख्याल से ये उस विचार की जीत है जो कहता है कि सच से प्यार करना सीखो।

मधुरेंद्र पाण्डे – ये फिल्म आपने ही डायरेक्ट भी की है तो क्या माना जाए कि भविष्य में आप डायरेक्शन में जाएंगे क्योंकि आपकी तारीफ रश्मि देसाई भी करती हैं?

अध्विक महाजन – रश्मि देसाई जी बहुत अच्छी इंसान हैं। शायद इसीलिए वो मेरी तारीफ कर रही हैं। मैं डायरेक्टर नहीं हूं। मैं एक्टर रहना चाहता हूं। हां कुछ कहानियां हैं जिसका मैं हिस्सा बनना चाहता हूं जब उन कहानियों के लिए कोई मुझे मौका नहीं देगा तो मैं खुद उसे बनाऊंगा। अपना यू ट्यूब चैनल बना लूंगा। सब करूंगा लेकिन बतौर एक्टर मुझे जो इस दुनिया को देना है वो मैं देकर जाऊंगा।

मधुरेंद्र पाण्डे – अब आखिरी सवाल, कोई सपना जो आप पूरा करना चाहते हों?

अध्विक महाजन – सिर्फ एक सपना है कि मुझे अपने राष्ट्रपति महोदय से नेशनल अवार्ड मिले। देखते हैं कि वो सपना कब पूरा होता है।

मधुरेंद्र पाण्डे – जी ज़रूर मिलेगा। इस फिल्म के ज़रिए बानगी देखकर तो ऐसा ही लगता है। आपसे बात करके बहुत अच्छा लगा। गॉसिपगंज के लिए वक्त निकाला धन्यवाद।

अध्विक महाजन – मुझे भी आपसे बात करके अच्छा लगा। धन्यवाद।

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