10 बी ग्रेड हिन्दी फिल्में, जिनका नाम भी आप किसी के सामने नहीं ले सकते

10 बी ग्रेड हिन्दी फिल्में, जिनका नाम भी आप किसी के सामने नहीं ले सकते, याद है वो स्कूल से बंक मार कर कांती शाह की फिल्में चोरी छिपे देखना? चेहरे पर रुमाल बांध कर फिल्म हॉल में घुसना और फिल्म खत्म होते ही दबे पांव हाल से भागना।

खैर, जितनी मौज इन फिल्मों के पोस्टर्स को देखने में आती है, उससे कई ज़्यादा इनके नाम सुन कर आती है।  फिल्मों के टाइटल (फिल्म का नाम) ज्यादातर कहानी पर डिपेंड करते हैं।

दर्शक फिल्म के टाइटल से ही अंदाजा लगाते हैं कि फिल्म में क्या खास है। लेकिन, कई नाम ऐसे हैं जिनके मतलब अलग ही निकाल लिए जाते हैं। कहना का मतलब है कि द्विअर्थी नाम (डबल मीनिंग) जिनका नाम होता है कुछ और मतलब निकला है।

1- राम जाने नाम रखने से पहले क्या सोचा था?

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2- किस दुकान की बात कर रहे हो भाई?

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3- ऐसा तो नहीं हो सकता लेकिन अब कह रहे हो तो मानना पड़ेगा

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 4- ये तो बहुत ही खतरनाक है!

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5- वाह भाई पुराने आशिक लगते हो

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6- साली के लिए इतना डेडिकेशन, वाह

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7- दादा कोंडके तो यही काम करते हैं

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8- आज के बाद चीखो मगर प्यार से

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9- पेप्सी पी कर भला कोई सेक्सी लग सकता है…लेकिन

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10- एक से तो वाकई तुम्हारा कुछ नहीं होगा

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ऐसा नहीं है कि सिर्फ बी ग्रेड फिल्में ही द्विअर्थी नाम से बनती हो। कुछ समय पहले विवेक ओबेरॉय की फिल्म किस्मत लव पैसा दिल्ली रिलीज हुई थी। इस फिल्म को फिल्म के पूरे नाम से नहीं बल्कि इसके शार्ट नाम से प्रचारित किया गया। इस फिल्म का नाम ‘केएलपीडी’ था। अब सब जानते हैँ देश खासकर उत्तर भारत में केएलपीडी शब्द का उपयोग हम सब कहां पर करते हैं। द्घिअर्थी नाम रखने के बाद भी फिल्म नहीं चली।

पुलकित सम्राट की फिल्म बिट्ट बॉस का नाम भी विवादों में रहा। फिल्म का नाम था सबकी लेगा बिट्ट बॉस। इस नाम पर बॉलीवुड के कुछ हलकों में आपत्ति भी हुई। हालांकि यह फिल्म सफल नहीं हुई और द्घिअर्थी नाम रखने का यह टोटका सफल नहीं हुआ।

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